PanchTantra की कहानी-बेकार का पचड़ा-भाग-3

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PANCHATANTRA-DAMANAK
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पंचतंत्र के बेकार का पचड़ा भाग-2 में आपने पढ़ा कि …………..

कल को यही मौका पडऩे पर इस भेद को खोल कर उसका अहित कर सकता है। अब उसने अपनी बात पर पर्दा डालने के लिए कहा, यार-जीना उसी का जीना है जिसके जीने से बहुतों को जिंदगी मिले। अपना पेट तो पक्षी भी अपनी चोंच से भर लेते हैं?

अब इससे आगे पढ़िए, भाग-3……..

करटक का चेहरा देखने पर दमनक (Damanak) को लगा इसका कुछ असर हुआ है। दमनक (Damanak) कुछ जोम में आ गया और इसी तर्ज पर कुछ और उपदेश पिलाने लगा। देखो, छोटी-मोटी नदियां और नाले-परनाले थोड़े से ही जल से उमड़ पड़ते हैं।

चूहे की अंजली भरते देर नहीं लगती है। ठीक यही हाल निकम्मे लोगों का है। जहां पैसे उनके हाथ में आये वे उसी से संतुष्ट होकर आगे हाथ-पांव मारना छोड़ देते हैं।

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