Website पर धोके से गई रकम वापस पायें

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Website पर ठगी का शिकार हो गए एक निजी म्यूजिक कंपनी में ब्रांच मैनेजर प्रवीण कुमार शाही।

मामला है आठ अगस्त की सुबह का। उनके क्रेडिट कार्ड से एक लाख से अधिक रकम उड़ाई जा चुकी थी।

प्रवीण के मुताबिक यह ट्रांजेक्शन उनके क्रेडिट कार्ड से यूनाइटेड स्टेट्स में अलग-अलग वेबसाइट के जरिए डॉलर में हुआ था।

Website पर ठगी में बैंक की होती है अहम भूमिका

साइबर सेल के प्रभारी इंस्पेक्टर अरुण कुमार सिंह के मुताबिक फॉरेन ट्रांजेक्शन के मामलों में ग्राहक को राहत दिलाने में सबसे अहम भूमिका बैंक की होती है।

ऐसे मामलों में रिपोर्ट दर्ज कराए जाने पर रिजर्व बैंक की गाइड लाइन के अनुरूप संबंधित बैंक जांच कराकर अपने ग्राहक को रकम वापस कराते हैं।

Website पर ठगी में पुलिस के सामने भी चुनौती

फॉरेन ट्रांजेक्शन के मामलों में पुलिस व साइबर क्राइम सेल के सामने जांच की चुनौतियां भी कम नहीं।
अधिकारियों के मुताबिक विदेशों के पेमेंट गेट-वे की डिटेल आसानी से नहीं उपलब्ध हो पाती।
लिहाजा ऐसे मामलों की जांच में काफी मुश्किलें आती हैं। ऐसे में सावधानी बरतना ही सबसे बड़ा उपाय है।
सावधानी से करें Website  का चयन

साइबर क्राइम के विशेषज्ञ कहते हैं कि Website पर शॉपिंग के लिए प्रतिष्ठित वेबसाइट का ही चयन करें।

सर्वाधिक सावधानी उनकी स्पेलिंग को टाइप करने में बरतें।
हैकर ज्यादातर ऐसी वेबसाइट अथवा फिशिंग के जरिए बैंक धारकों का गोपनीय डाटा हासिल करते हैं।
लिहाजा ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान खासकर सही स्थान चुनें।
Website पर कुछ भी करें, ध्यान पूर्वक करें।
Website  की स्पेलिंग ध्यान से चेक करें।
एक-एक वर्ड को ध्यान से देखें।
कहीं भी शंका दिखाई दे तो गूगल पर चेक करें।
नो रिप्लाई वाले ईमेल पर कभी भी किसी प्रकार से व्यवहार ना करें।
ऑनलाइन मामले मैं वेबसाइट पर हरे रंग का लॉक लगा है कि नहीं जरूर चेक करलें।
क्योंकि प्रतिष्ठित कंपनियों के नाम से मिलती-जुलती सैकड़ों फर्जी वेबसाइट भी मौजूद हैं।

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